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Wednesday, May 23, 2007

आमचो बस्तर, किमचो सुन्दर था

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कवि- राजीव रंजन प्रसाद
स्वर- राजीव रंजन प्रसाद
अक्षर- आमचो बस्तर, किमचो सुन्दर था
स्रोत- हिन्द-युग्म

Posted by Hind-Yugm at 10:23 PM |  3 comments  

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3 Comments:

शैलेश भारतवासी said...

आपकी आवाज़ में कोई कमी नहीं है। दतार-चढ़ाव ठीक है। रिकार्डिंग की जो गुणवत्ता है वो धीरे-धीरे सुधरेगी।

11:57 PM
Anonymous said...

wah wah wah !!!
bahut sundar !

1:48 AM
Anonymous said...

वाह,
राजीव जी,कविता बहुत सुन्दर तो है ही..आपके स्वर मे सुन के आनन्द आ गया
बहुत सुन्दर


सस्नेह
गौरव शुक्ल

1:07 AM

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