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Sunday, May 27, 2007

अब हम से और अपने दिल को बहलाया नहीं जाता

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कवि- अजय यादव
स्वर- सुनीता चोटिया
अक्षर- अब हम से और..
स्रोत- हिन्द-युग्म

Posted by Hind-Yugm at 9:04 AM |  2 comments  

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2 Comments:

Anonymous said...

Galat-Palat shaayri hai. ek dam mazaa nahin aayaa

8:17 PM
शैलेश भारतवासी said...

अच्छी कोशिश है। एक-दो बार और मेहनत करेंगी तो आवाज़ ज़ादू बिखेरने लगेगी।

4:33 PM

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