Saturday, Jun 09, 2007
पता तो चले
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कवि- पंकज तिवारी
स्वर- पंकज तिवारी
अक्षर- उन्हें पता तो चले
स्रोत- हिन्द-युग्म
Posted by Hind-Yugm at 9:57 AM | 2 comments
2 Comments:
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धुआँ-धुआँ सा उठ रहा क्या हैज़िंदगी अब सही नहीं जाती
अब हम से और अपने दिल को बहलाया नहीं जाता
और झलक भर....
एक पागल दूजे से बोला
मैं गुजरता रहा....
आमचो बस्तर, किमचो सुन्दर था
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good, nice
पंकज जी,
आपने तो मज़ा ला दिया है। दूसरा भी गाइए भाई। इंतज़ार है।