Wednesday, Jul 25, 2007
हर लम्हा एक विस्मय
Download this episode (3 min)
कवि- सीमा कुमार
स्वर- विकास कुमार
अक्षर- हर लम्हा एक विस्मय
स्रोत- हिन्द-युग्म
Posted by Hind-Yugm at 9:48 AM | 11 comments
11 Comments:
Recent Posts
जीवनखुदा के जी में जाने क्या है
माँ, 'वो' बड़ी प्यारी है
निठारी के मासूम भूतों ने पूछा
चल यार कुछ सद्दा लूटें
चलो कुछ बात करें
पिता से
Archives
Nov 2007Oct 2007
Sep 2007
Aug 2007
Jul 2007
Jun 2007
May 2007
Excellent,the back ground score made it seem very professional
Excellent,the back ground score made it seem very professional
मित्र, आज सुबह हीं सीमा जी की रचना पढी थी। लेकिन आपकी आवाज में सुनने पर न जाने कहाँ खो गया। संगीत के सान्निध्य के कारण मानो लहरों की स्वर-लहरियाँ कानों में गुंजने लगीं हो और उसपर आपकी आवाज़ का तिलिस्म मानस-पटल को तरंगित कर उठा।
आपसे कुछ और सुनने की प्यास बढ गई है। उम्मीद करता हूँ जल्द हीं कुछ नया मिलेगा।
-विश्व दीपक 'तन्हा'
विकास जी,
आपने तो दिल जीत लिया भाई। बैकग्राउंड स्कोर में आपको शत-प्रतिशत अंक दिये जा सकते हैं। कविता में मैं कहीं खो सा गया था। बिलकुल आपने बाँधे रखा। मैं लगभग १० बार सुन चुका हूँ। बस इसी प्रकार लगे रहिए।
धन्यवाद विकास, मेरी कविता हो एक नया और सुंदर रूप देने के लिए :)
यहाँ मैंने और भी कुछ लिखा है इस कविता के बारे में : http://lalpili.blogspot.com/2007/07/blog-post_26.html
सीमा कुमार
बहुत बढ़िया प्रस्तुतिकरण, विकास की सम्मोहनी आवाज में. बधाई.
बहुत बढ़िया प्रस्तुतिकरण, विकास की सम्मोहनी आवाज में. बधाई.
--समीर लाल
(उपर की टिप्पणी में नाम नहीं आ पाया, अतः पुनः)
aap sabon ka bahut bahut dhanyawaad.
aashaa hai ki aage bhi protsahan milta rahega. :)
कविता के साथ आपकी आवाज सचमुच उसे बहुत ऊँचाई प्रदान करती है।
और उपयुक्त संगीत एक आध्यात्मिक सी नई दुनिया में ले जाता है।
आपमें सचमुच कविता की भावनाओं को पकड़ने की शक्ति है।
- गौरव सोलंकी
bahut hi sundar baandh lene waala sawar ...sun ke bahut accha laga
कविता बहुत सुन्दर है और उसे सुनाया भी बहुत सुन्दर तरीके से है...