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Thursday, Jul 26, 2007

तेरे छूने से

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कवयित्री- रंजना भाटिया
स्वर- रंजना भाटिया
अक्षर- तेरे छूने से
स्रोत- हिन्द-युग्म

Posted by Hind-Yugm at 4:59 AM |  3 comments  

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3 Comments:

शैलेश भारतवासी said...

आप बेकार में घबरा रही थीं। अच्छा गाया है। धीरे-धीरे लता मंगेशकर हो जायेंगी।

4:15 AM
Anonymous said...

shailesh ji bilkul sach kah rahe hain . bahut achchaa gaya hai ranjana ji aapne

4:42 AM
Ranju said...

शुक्रिया शैलेश ज़ी आलोक ज़ी ..आपने मेरा होसला बढ़ाया ..धन्यवाद :)

1:04 AM

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