Friday, Jul 27, 2007
पता है चंदू
Download this episode (2 min)
कवि- गौरव सोलंकी
स्वर- गौरव सोलंकी
अक्षर- पता है चंदू
स्रोत- हिन्द-युग्म
Posted by Hind-Yugm at 12:48 PM | 1 comments
1 Comments:
Recent Posts
वाचाल मौनतेरे छूने से
हर लम्हा एक विस्मय
जीवन
खुदा के जी में जाने क्या है
माँ, 'वो' बड़ी प्यारी है
निठारी के मासूम भूतों ने पूछा
Archives
Nov 2007Oct 2007
Sep 2007
Aug 2007
Jul 2007
Jun 2007
May 2007
पहली बार आपकी आवाज़ में कुछ सुन रहा हूँ (मंच पर)। जब आप शुरूआत कर रहे हैं ना 'पता है चन्दू'॰॰॰ बहुत बढ़िया आकर्षण है उस ध्वनि में। बिलकुल लगता है कि आप चन्दू को बता रहे हैं। लेकिन आपकी आवाज़ हरिहरन की तरह लगातर ज़ारी है। कुछ जगहों पर जहाँ पूर्ण विराम है, रुकना चाहिए था। कविता का उत्तार्द्ध आपने बहुत बढ़िया कहा है।
कोशिश ज़ारी रखिए