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Thursday, Aug 02, 2007

अपने-अपने प्यार की परिभाषा

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कवयित्री- रंजना भाटिया
स्वर- रंजना भाटिया
अक्षर- अपने-अपने प्यार की परिभाषा
स्रोत- हिन्द-युग्म

Posted by Hind-Yugm at 2:02 PM |  2 comments  

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2 Comments:

shobha said...

रंजना जी
बहुत सुन्दर कविता लिखती हैं आप ।
अपनी कविता को अपना स्वर देकर
आपने उसे और भी प्रभावपूर्ण बना दिया । बधाई
स्वीकार करें ।

7:35 AM
Ranju said...

शुक्रिया शोभा ज़ी ..आपने मेरा होसला बढ़ाया ..धन्यवाद :)

1:06 AM

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