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Friday, Sep 14, 2007

हिन्दी दिवस विशेष : 4

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कवि- रितू बन्सल
स्वर- विकास कुमार
अक्षर- काव्य-पल्लवन
स्रोत- हिन्द-युग्म

Posted by Hind-Yugm at 11:37 AM |  4 comments  

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4 Comments:

शैलेश भारतवासी said...

इसमें आपने सच्चे हिन्दी-प्रेमी का दर्द पिरोया है।

4:50 AM
Anonymous said...

मैंने नही, ये तो रितू जी की लेखनी है जिसने यह कमाल कर दिखाया है. :) धन्यवाद रितू जी!

5:40 AM
shobha said...

प्रिय विकास
तुमने सचमुच में कविता में जान डाल दी है । मैं भी यही मानती हूँ कि श्रेय तुमको ही जाता है ।
खुदा अच्छी कविता लिखवाए और तुम उसको अपना स्वर दो । बहुत-बहुत आशीर्वाद

5:46 AM
Anonymous said...

शोभा जी! आपका आशीर्वाद यूँ ही मिलता रहे, यही कामना है.

11:18 PM

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